Posted by: Shikha on: April 25, 2007
तुझे भूलने की कोशिश में,
जब दिल ये ज़िद पे आ गया,
मैं आँख मूँद के बैठ गयी,
तू ख़याल पे फिर छा गया…
ये धड़कन कहीं रुक जाए ना,
मेरी नब्ज़ ठहर ना जाए कहीं,
तूने वक़्त किया मेरा लम्हा लम्हा,
मगर मौत को आसान बना गया…
मेरी हर दलील को किया अनसुनी,
मेरी फ़रियाद भी तो सुनी नहीं,
मैं हैरान हूँ, हाँ कुछ [...]
Posted by: Shikha on: April 21, 2007
छलके है आँखें, तरसे है मन ये,
रुकी हुई है धड़कन, रुकी रुकी साँसें
डगमगा रही हूँ मैं फिर चलते चलते,
मुझे थामा था मेरे बचपन मे जैसे,
गुडिया को अपनी अपना हाथ फिर थमा दे
बाबुल मुझे फिर से तू अपने पास बुला ले
वो आँगन का झूला क्या अब भी पड़ा है
वो तुलसी का पौधा क्या अब भी खड़ा [...]
Posted by: Shikha on: April 19, 2007
मेरी बेबस सी ये ज़ुबान क्या कहे तुम से,
मगर बहुत रोए रात हम तुझे याद कर के…
वो दीवानगी मेरी, और वो बेबाकपन मेरा,
बस हँसते रहे हम आँखों मे आँसू भर के…
जाने क्यों ना समझे तुम मेरे ज़ज़्बातों को,
हमने तो रख दी हर ख़्वाहिश बे-लिबास कर के…
ये पूछते है लोग, क्या हुआ है तुम्हे “शिखा”,
क्यों जी रही [...]
Posted by: Shikha on: April 12, 2007
ख्वाबों और ख़्यालों का चमन सारा जल गया,
ज़िंदगी का नशा मेरा धुआ बन कर उड़ गया…
जाने कैसे जी रहे है, क्या तलाश रहे है हम,
आँसू पलकों पर मेरी ख़ुशियों से उलझ गया…
सौ सदियों के जैसे लंबी लगती है ये ग़म की रात,
कतरा कतरा मेरी ज़िंदगी का इस से आकर जुड़ गया…
मौत दस्तक दे मुझे तू, अब अपनी [...]
Posted by: Shikha on: April 8, 2007
कुछ ना सुना मुझे दिल की बात,
मेरा दिल नहीं मेरे बस मे आज…
गमो की बदली से है ढका हुआ,
मेरा चाँद अभी है छुपा हुआ…
आज उदास उदास सी हर राह है
और रूठा हुआ सा मेरा खुदा है…
ये प्यार भी कितना अजीब है,
वो मेरी नज़र के इतने क़रीब है…
मगर समझ के भी है जो नासमझ,
कैसे दिल से मेरे वो गया उलझ…
वह [...]
Posted by: Shikha on: April 4, 2007
मुझे इतनी भी सज़ा ना दे,
मेरे प्यार की इंतहा ना ले…
रुक जा ए चाँद थम जा ज़रा,
दो घड़ी मुझे भी निहार ले…
मैं टूट कर बिखर चली,
मेरी ख़ाक को यूँ हवा ना दे…
दो बोल तुझसे सुन सकूँ कभी,
मैं इंतज़ार मे सदा रही…
तू चल पड़ा मुझे छोड कर,
दीवार सी मैं खड़ी रही…
सहम गयी हूँ बस इस बात से,
कहीं [...]
Posted by: Shikha on: April 3, 2007
आओ कुछ बात करे, हम तन्हा कय़ों है?
आओ कुछ दिल की कहे, हम तन्हा कय़ों है?
कोई बस इतना बता दे, हम तन्हा कय़ों है?
कोई तो मुझको सदा दे, हम तन्हा कय़ों है?
रोज़ मिलती है मुझे, ये कोई अजनबी जैसे,
रूठी हुई है मुझसे, मेरी परछाई ऐसे,
कोई समेटो ज़रा, कोई तो बुला दो इसको,
मुझसे थोडी बहुत पह्चान करा दो इसको,
आओ हाथ थामो मेरा, हम [...]
Posted by: Shikha on: April 1, 2007
Humne mehboob ki aankhon par
Haathon ko apne rakh kar dekha…
Nafraat ke aangaaro ko jab unkii
Nazaron mey dehekta dekhaa….
Aur Unhii haathon ko dil par rakh kar,
Apnii Hasraton ko khud apnii Aankhon se Jaltaa dekhaa…
Chand ki tarah humne Pyar ko bhi marrtaa dekha…
Ek ajnabii si nazar deewar ko bhedtii hui,
Ek ukhdii hui saans jigar ko chedtii huii…
Khud [...]
Albeo theme by Design Disease
Recent Comments