Posted by: Shikha on: April 8, 2007
कुछ ना सुना मुझे दिल की बात,
मेरा दिल नहीं मेरे बस मे आज…
गमो की बदली से है ढका हुआ,
मेरा चाँद अभी है छुपा हुआ…
आज उदास उदास सी हर राह है
और रूठा हुआ सा मेरा खुदा है…
ये प्यार भी कितना अजीब है,
वो मेरी नज़र के इतने क़रीब है…
मगर समझ के भी है जो नासमझ,
कैसे दिल से मेरे वो गया उलझ…
वह चुप रहा, मैं भी चुप रही,
दरमियाँ बिखरी फिर ख़ामोशी वही….
क्यों मज़बूरियाँ हमसे जीत गयी,
क्यों मुहब्बत की रुत्त बीत गयी …
सब सवाल अधूरे से रह गये,
बस दो आँसू रुखसार पे बह गये…
किसी को क्या कहे हम अपना ग़म,
सच ….. बेज़ुबान से हो गये है हम…..
6 | a. raheman
November 24, 2007 at 5:33 am
aadab , alfaj main gahrayon bhare meaninigs aur dard bhi hai………..mujhe bahut khushi haui aur bahut pusand aai aur ek baat pic bhi bahut sahi choose kiya hai………….take care
| Shubhashish Pandey on कुछ बाते अधूरी सी!!! | |
| Shubhashish Pandey on ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत… | |
| Ammad Nayab on Phir wohi Tanhai hai!!! | |
| Tosha on May Be U Understand… | |
| M.Usman Aslam on Phir wohi Tanhai hai!!! |
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April 9, 2007 at 1:47 am
बहुत सुन्दर